Tuesday, August 2, 2016

मालिक ये हाथ रखें नीचे,हम हाथ उठाना सीख गए - सतीश सक्सेना

डमरू तबला कसते कसते,हम धनक उठाना सीख गये,
तेरा गंद उठाकर सदियों से, तेरा आबोदाना सीख गये !


हमसे ही अस्मिता भारत की, परिहास बनाना बंद करें
सदियों से पिटते पिटते ही,तलवार चलाना सीख गए !

मालिक गुस्ताखी माफ़ करें,घरबार हिफाज़त से रखना
बस्ती के बाहर भी रहकर,हम आग जलाना सीख गये !

बेपर्दा घर, जूता, गाली, मजदूरी कर हम  बड़े हुए !
जाने कब, ऊंचे महलों की दीवार गिराना सीख गए ! 

तेरे जैसा ही जीवन पाकर,पशुओं जैसा बर्ताव मिला,
मालिक ये हाथ रखें नीचे,हम हाथ उठाना सीख गए !

3 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 03 अगस्त 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. इंसानों का जीवन पाकर, पशुओं जैसा बर्ताव मिला,
    मालिक ये हाथ रखें नीचे,हम हाथ उठाना सीख गए !
    ..बहुत हुआ शोषण ...आखिर कब तब सहन करता रहेगा कोई ......सार्थक प्रस्तुति

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एक निवेदन !
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- सतीश सक्सेना

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