Sunday, December 6, 2009

मैं हूँ कैसा नादान प्रिये - सतीश सक्सेना

तुम मेरे दिल की रानी हो 
मैं तेरे दिल का कचरा हूँ
पति ढूँढा है, लक्ष्मीवाहन 
तुम हो देवी सौभाग्यवती
तुम हो खिचडी में घी जैसी  मैं चटनी जैसा दिखता हूँ
मैं हूँ कैसा नादान प्रिये, कैसे समझाऊँ प्यार प्रिये  !


तुमतो लगतीं जीनत अमान
मैं प्राण सरीखा दिखता हूँ ,
तुम तो हेमा की कापी हो
मैं प्रेम चोपडा दिखता हूँ !
दोनों पहिये बेमेल लगे,  जीवन गाड़ी है खड़ी प्रिय
मैं हूँ कैसा नादान प्रिये, कैसे दिखलाऊं प्यार प्रिये


मैं एक गाँव का हूँ गंवार ,
तुम छैल छबीली दिल्ली की
मैं राम राम और पाँव छुऊँ
तुम हाय हाय और हेल्लो की
जीवन गाड़ी के दो पहिये , दोनों कैसे बेमेल मिले !
मैं हूँ कैसा नादान प्रिये , कैसे समझाऊँ प्यार प्रिये


तुम हो गन्ने की रस जैसी
मैं कोल्हू जैसा दिखता हूँ 
तेरा चेहरा गुलाब जैसा 
मैं नोडू जैसा दिखता हूँ
तुम नॉएडा में इंदिरा गाँधी,मैं राज नारायण लगता हूँ
मैं हूँ कैसा नादान प्रिये , कैसे समझाऊँ प्राण प्रिये  !

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- सतीश सक्सेना