उच्चारण मन्त्रों का अशुद्ध
कर अपने को पंडित माने
मांगलिक समय पर श्राद्धमंत्र
मारण पर मंगल गान करें !
संस्कृत का क ख ग ना पढ़ा,व्याकरण तत्व का ज्ञान नहीं
ऐसे पंडित, कुल गुरु बना , क्यों लोग मनाते दीवाली ?
भोजन में लेते मांस और
मदिरा पीते जल के बदले
पूजा में बैठ आचरण पर
वेदों की ऋचा सुनाते हैं
ऐसे ज्ञानी पुरोहितों से है , त्राहि त्राहि माँ सरस्वती !
अधकचरा ज्ञान धर्म का ले क्यों लोग मनाते दीवाली ?
ईश्वर समक्ष अपने को रख
बनियों को अर्थ हेतु माना
क्षत्रिय को सौंपी निज रक्षा
खुद पूज्य बने सारे युग के
सेवा करने को निम्न कोटि,शूद्रों को जन चाकर माना ,
करवा संशोधित,आदि ग्रन्थ क्यों लोग मानते दीवाली ?
ऐसा कोई अवतार धरो ,
जो नष्ट वर्ण संकट करदे !
अपने अपने कर्मानुसार
मानव,समाज का काम करे !
मिल बैठें आपस में सारे व्राह्मण और शूद्र साथ होकर
औरों के लिए घ्रणा लेकर,क्यों लोग मनाते दीवाली ?
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- सतीश सक्सेना