Monday, August 11, 2008

एक पिता का ख़त पुत्री के नाम ! ( चौथा भाग )


यहाँ एक दुखी पिता अपनी लाडली को विवाह की आवश्यकता बताने, समझाने का प्रयत्न कर रहा है ! भारतीय समाज की सबसे मजबूत गांठ, आज पाश्चात्य सभ्यता समर्थन के कारण खतरे में है ! नारी अपने बिभिन्न रूपों को भूल कर अपने एक ही रूप को याद करने का प्रयत्न कर, तथाकथित जद्दोजहद कर रही है ! एवं आधुनिकीकरण की तरफ़ भागता समाज, हमारी शानदार व्यवस्था भूल कर चमक दमक में खो रहा है ! ऐसे समय में ,यह कविता बहुतों के माथे पर बल डालेगी, मगर यह एक भारतीय पिता की भेंट है अपनी बेटी को !

बचपन यहाँ बिताकर अब तुम
अपने नए निवास चली हो !
आज पिता की गोद छोड़ कर
करने नव निर्माण चली हो !
केशव का उपदेश याद कर, 

कर्म भूमि में तुम उतरोगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी,घर की रानी तुम्ही रहोगी !

इतने दिन तुम रहीं पिता की
गोद , 
मातृ  का मान बढाया,
अब जातीं घर त्याग अकेली
एक नया संसार बसाया ,
जब भी याद पिता की आये ,

अपने पास खड़े पाओगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी,घर की रानी तुम्ही रहोगी !

कोई नन्हा जीवन तेरा ,
खड़ा हुआ बांहे फैलाए !
इस आशा के साथ,उठाओगी
तुम , अपनी बांह पसारे !
ले नन्हा प्रतिरूप गोद में , 

ममता मयी तुम्ही दीखोगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी,घर की रानी तुम्ही लगोगी !

श्रष्टि नयी की रचना करने,
विधि है, इंतज़ार में तेरे !
सुन्दरता की नन्ही उपमा
खड़ी, तुम्हारी आस निहारे
तृप्ति मिलेगी रचना करके

मां की गरिमा तुम्हे मिलेगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी घर की रानी तुम्ही रहोगी !

नर नारी के शुभ विवाह पर
गांठ विधाता स्वयं बांधते,
शायद देना श्रेय तुम्ही को
जग के रचनाकार चाहते !
जग की सबसे सुंदर रचना 

की निर्मात्री तुम्ही रहोगी !
पहल करोगी अगर नंदिनी घर की रानी तुम्ही रहोगी !

next - http://satish-saxena.blogspot.in/2008/10/blog-post_14.html

12 comments:

  1. नर नारी के शुभ विवाह पर
    गांठ विधाता स्वयं बांधते,
    शायद देना श्रेय तुम्ही को
    जग के रचनाकार चाहते ,
    जग की सबसे सुंदर रचना की निर्मात्री तुम्ही रहोगी !
    पहल करोगी अगर नंदिनी घर की रानी तुम्ही रहोगी !
    " ah! dil bharee, ankhen nam ho aayen hain" bus or kya khen...."

    Regards

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  2. सतीश जी बहुत सुन्दर भाव,
    जग की सबसे सुंदर रचना की निर्मात्री तुम्ही रहोगी !
    पहल करोगी अगर नंदिनी घर की रानी तुम्ही रहोगी !
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  3. जग की सबसे सुंदर रचना की निर्मात्री तुम्ही रहोगी !
    पहल करोगी अगर नंदिनी घर की रानी तुम्ही रहोगी !
    बहुत सुन्दर कविता। बधाई स्वीकारें।

    ReplyDelete
  4. सुन्दर कविता.. बधाई!!

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  5. भारतीय समाज की सबसे मजबूत गांठ, आज पाश्चात्य सभ्यता समर्थन के कारण खतरे में है ! बहुत जोरदार कविता हर लिहाज से !
    प्रणाम हैं आपको !

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  6. भाव प्रवण
    और
    मार्मिक प्रस्तुति
    मन को छूने वाली.
    ===============
    डॉ.चन्द्रकुमार जैन

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  7. बहुत ही सुंदर लगी आपकी यह कविता ..दिल को छु जाने वाली है यह पंक्तियाँ

    श्रष्टि नयी की रचना करने,
    विधि है इंतज़ार में तेरे !
    सुन्दरता की नन्ही उपमा
    खड़ी, तुम्हारी आस निहारे
    तृप्ति मिलेगी रचना करके मांकी गरिमा तुम्हे मिलेगी !
    पहल करोगी अगर नंदिनी घर की रानी तुम्ही रहोगी !

    ReplyDelete
  8. बहुत ही सुंदर भावना है. धन्यवाद!

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  9. नर नारी के शुभ विवाह पर
    गांठ विधाता स्वयं बांधते,
    शायद देना श्रेय तुम्ही को
    जग के रचनाकार चाहते ,
    जग की सबसे सुंदर रचना की निर्मात्री तुम्ही रहोगी !
    पहल करोगी अगर नंदिनी घर की रानी तुम्ही रहोगी !

    बहुत सुन्दर कविता। बधाई स्वीकारें।

    ReplyDelete
  10. जग की सबसे सुंदर रचना की निर्मात्री तुम्ही रहोगी !
    पहल करोगी अगर नंदिनी घर की रानी तुम्ही रहोगी !


    bhaut bhaavpurn panktiyan

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  11. बहुत सुन्दर.
    मजा आ गया, बंधुवर.. बधाई....

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  12. बहुत सुन्दर, सार्थक और भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

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- सतीश सक्सेना

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